एनसीईआरटी कक्षा 12 गणित अध्याय 8 समाकलनों के अनुप्रयोग नोट्स

कक्षा 12 एक बोर्ड कक्षा हैं और कक्षा 12 में दिय गय अध्याय थोड़ा पेंचीदा भी हैं। इसलिय छात्रों के समस्या को कम करने के लिए हमने बोर्डस्टडी एक्सपर्ट द्वारा तैयार कक्षा 12 गणित अध्याय 8 समाकलनों के अनुप्रयोग नोट्स दिया हैं। ये कक्षा 12 छात्रों के लिए रामबाण हैं। इसलिय कक्षा 12 में अध्ययरत सभी छात्र एवं छात्राओं को इस नोट्स का लाभ उठाना चाहिय।

जेईई और बोर्ड दोनों एग्जाम के तैयारी के लिए कक्षा 12 गणित अध्याय 8 समाकलनों के अनुप्रयोग नोट्स बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इसमें समाकलनों के अनुप्रयोग अध्याय के सभी कॉन्सेप्ट को विस्तार से समझाया गया हैं जिससे छात्रों को समझने में आसानी हो।

समाकलनों के अनुप्रयोग नोट्स

नोट्स को बहुत ही अच्छे एवं सुव्यवस्थित ढंग से लिखा गया हैं जिससे छात्र को नोट्स पढ़ने के दौरान कोई कठिनाई न हों। इसका उपयोग छात्र अपने नियमित अध्यन के समय एवं एग्जाम के समय में भी कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

इस अध्याय में साधारण वक्रों के अन्तर्गत, सरल रेखाओं, वृत्तों, परवलयों तथा दीर्घवृत्तों (केवल मानक रूप) की चापों के बीच घिरे क्षेत्रफल को ज्ञात करने के लिए समाकलनों के एक विशिष्ट अनुप्रयोग का अध्ययन करेंगे।

साधारण वक्रों के अन्तर्गत क्षेत्रफल :-

दिए वक्र y=f(x), x-अक्ष, कोटियों x=a\text{दिए वक्र } y = f(x) \text{, } x \text{-अक्ष, कोटियों } x = a \\
तथा x=b से घिरे क्षेत्र का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए\text{तथा } x = b \text{ से घिरे क्षेत्र का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए} \\
प्रारम्भिक क्षेत्रफल dA ज्ञात करते हैं।\text{प्रारम्भिक क्षेत्रफल } dA \text{ ज्ञात करते हैं।} \\
पूरे घिरे क्षेत्रफल को बहुत सारी आयताकार पट्टियों से\text{पूरे घिरे क्षेत्रफल को बहुत सारी आयताकार पट्टियों से} \\
घिरा माना जा सकता है। उनमें से एक पट्टी का क्षेत्रफल\text{घिरा माना जा सकता है। उनमें से एक पट्टी का क्षेत्रफल} \\
प्रा० क्षेत्रफल dA कहलाता है।\text{प्रा० क्षेत्रफल } dA \text{ कहलाता है।}
∵ आयताकार पट्टी का क्षे० = ल० × चौ०\because \text{ आयताकार पट्टी का क्षे० = ल० } \times \text{ चौ०} \\
dA=ydxdA = y dx \\
पुन: x=a व x=b के बीच सभी पट्टियों के क्षेत्रफलों का\text{पुन: } x = a \text{ व } x = b \text{ के बीच सभी पट्टियों के क्षेत्रफलों का} \\
योगफल\text{योगफल} \\
A=∫abdA=∫abydx=∫abf(x)dxA = \int_{a}^{b} dA = \int_{a}^{b} y dx = \int_{a}^{b} f(x) dx
पुन: यदि वक्र x=g(y), y-अक्ष, y=c,\text{पुन: यदि वक्र } x = g(y) \text{, } y \text{-अक्ष, } y = c \text{,} \\
y=d से घिरे क्षेत्र का क्षे० ज्ञात करने के लिए:y = d \text{ से घिरे क्षेत्र का क्षे० ज्ञात करने के लिए:} \\
A=∫cdxdy=∫cdg(y)dyA = \int_{c}^{d} x dy = \int_{c}^{d} g(y) dy \\
यहाँ क्षैतिज पट्टियों पर विचार करेंगे।\text{यहाँ क्षैतिज पट्टियों पर विचार करेंगे।}

वक्र अनुरेखण में सदैव स्मरणीय

  • यदि वक्र के समीकरण में y की सभी घाते सम हैं तो वक्र x-अक्ष के सापेक्ष सममित होगा।
  • यदि वक्र के समीकरण में x की सभी घाते सम हैं तो वक्र y-अक्ष के सापेक्ष सममित होता है।
  • यदि वक्र के समीकरण में x व y दोनों की सभी घातें सम हों तो वक्र दोनों अक्षो के सापेक्ष सममित होता है।
  • यदि वक्र के समीकरण में x व y को परस्पर बदलने से कोई परिवर्तन नहीं हो तो वक्र रेखा y=x के सापेक्ष सममित होता है।
  • यदि वक्र के समीकरण में अचर पद नहीं है तो वक्र मूल बिन्दु से गुजरेगा।
  • वक्र के समीकरण में y=0 और x=0 रखने पर क्रमशः x-अक्ष और y अक्ष के साथ वक्र के प्रतिच्छेदन बिन्दु प्राप्त होते हैं।

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