कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 2 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक नोट्स पीडीएफ़

कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 2 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।

वैसे तो अर्थशास्त्र एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 2 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक नोट्स

अध्याय 3 : मुद्रा और साख

महत्वपूर्ण तथ्य

आर्थिक कार्यों के क्षेत्रक:- आप लोगों को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में कार्यरत पाएँगे। इनमें से कुछ गतिविधियाँ वस्तुओं का उत्पादन करती है। कुछ अन्य सेवाओं का सृजन करती है। ये गतिविधियाँ हमारे चारों ओर हर समय सम्पादित होती है।

क्षेत्रक:- अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो प्राकृतिक संसाधनों का सीधा उपयोग करता है। इसमें कृषि, वानिकी, मछली पकड़ना भी शामिल है।

प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधियाँ:- जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते है तो इसे प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधियाँ कहा जाता है।

उदाहरण:- कृषि, खनन, मत्स्य पालन, डेयरी, शिकार आदि।

NOTE :- प्राथमिक क्षेत्रक को कृषि एंव सहायक क्षेत्रक भी कहा जाता है। | जय माता दी

द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ:- इस क्षेत्र के अन्तर्गत वे क्रियाएँ सम्मिलित होती है जिनमें प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रक्रिया के माध्यम से अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है।

उदाहरण:- फर्नीचर उद्योग, कागज़ निर्माण उद्योग, सूती वस्त्र उद्योग, लोहा व इस्पात उद्योग।

तृतीयक क्षेत्रक:- इसके अन्तर्गत वे क्रियाएँ आती है जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों के विकास में मदद करती है। इसे “सेवा क्षेत्रक” भी कहते है।

उदाहरण:- अध्यापक, डॉक्टर, वकील, रेलवे, दूरसंचार व दुकानदार, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि।

NOTE :- प्राथमिक क्षेत्रक सबसे अधिक रोजगार देता है।

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