कक्षा 10 नागरिक शास्त्र अध्याय 2 संघवाद नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।
वैसे तो नागरिक शास्त्र एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 नागरिक शास्त्र अध्याय 2 संघवाद नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।
संघवाद नोट्स
अध्याय 3 : जाति, धर्म और लैंगिक मसले
महत्वपूर्ण तथ्य
संघवाद:- संघवाद शासन की वह प्रणाली है जिसमें सत्ता का विभाजन केन्द्रीय प्राधिकार और सरकार की अंगीभूत इकाइयों के मध्य होता है।
“एक ऐसी शासन व्यवस्था जिसमें संविधान द्वारा शासन की शक्तियों का केन्द्र सरकार एंव राज्य सरकार के मध्य बँटवारा कर दिया जाता है।”
भारत में संघवाद का स्वरूप:-
- राज्यों का संघ:- भारत में अपनी आन्तरिक विविधता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न राज्यों के संघ का गठन किया गया है।
- त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था:- भारतीय संविधान में मूल रूप से दो स्तर की शासन व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
- (A) संघ या केन्द्र सरकार (B) राज्य सरकारें बाद में स्थानीय शासन की संस्थाओं को तीसरे स्तर के रूप में संविधान में मान्यता दी गई। अन्य किसी भी देश की तरह यहाँ भी तीनों स्तरों की शासन व्यवस्थाओं को अलग-अलग अधिकार क्षेत्र है।
- शक्तियों का विभाजन:- भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से केन्द्र और राज्य सरकारों के मध्य विधायी अधिकारों को तीन सूचियों के द्वारा विभाजित किया गया है।
[अ] संघ सूची [ब] राज्य सूची [स] समवर्ती सूची
- न्यायपालिका की सर्वोच्चता:- भारतीय संघीय व्यवस्था में न्यायपालिका स्वतन्त्र व सर्वोच्च है। शक्तियों के बँटवारे के सम्बन्ध में कोई विवाद होने पर उसका फैसला सर्वोच्च न्यायालय में ही होता है।
संघवाद/संघीय व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ:-
- सरकार के दो या अधिक स्तर:- संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता केन्द्रीय प्राधिकरण और उसकी विभिन्न अनुषांगिक इकाइयों के मध्य बँट जाती है। सामान्यतया: संघीय शासन व्यवस्था में दो स्तर पर सरकारें होती है। एक सरकार सम्पूर्ण देश के लिए होती है एंव दूसरी सरकार राज्य स्तर की होती है। भारत में सरकार का तीसरा स्तर स्थानीय स्वशासन भी है।
एक नागरिक समूह, अलग-अलग अधिकार:- संघीय शासन व्यवस्था में अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती है, पर कानून बनाने, कर वसूलने एंव प्रशासन का उनका अपना-अपना अधिकार क्षेत्र होता है।