कक्षा 10 नागरिक शास्त्र अध्याय 1 सत्ता की साझेदारी नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।
वैसे तो नागरिक शास्त्र एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 नागरिक शास्त्र अध्याय 1 सत्ता की साझेदारी नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।
सत्ता की साझेदारी नोट्स
अध्याय 2 : संघवाद
महत्वपूर्ण तथ्य
बेल्जियम और श्रीलंका:- बेल्जियम यूरोप का एक छोटा-सा देश है, यह क्षेत्रफल में हमारे हरियाणा राज्य से भी छोटा है। इसकी सीमाएँ फ्रांस, नीदरलैण्ड, जर्मनी और लक्समबर्ग से लगती है।
Q. बेल्जियम किस महाद्वीप का देश है?
Ans:- यूरोप
NOTE :- बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स है।
बेल्जियम की जातीय बुनावट:- बेल्जियम की जातीय बुनावट बहुत जटिल है। देश की कुल आबादी का 59 प्रतिशत हिस्सा फ्लेमिश इलाके में रहता है। तथा डच भाषी है। 40 प्रतिशत लोग वेलोनिया क्षेत्र में रहते हैं तथा फ्रेंच बोलते है। शेष 1 प्रतिशत लोग जर्मन बोलते है। राजधानी ब्रूसेल्स के 80 प्रतिशत लोग फ्रेंच बोलते है। तथा 20 प्रतिशत लोग डच भाषा बोलते है।
श्रीलंका की जातीय बुनावट:- श्रीलंका में अनेक जातीय समूहों के लोग है। सबसे प्रमुख सामाजिक समूह सिंहलियों का है जिनकी आबादी कुल जनसंख्या की 74% है। दूसरा स्थान तमिलों का है। जिनकी आबादी कुल जनसंख्या की 18% है। 7% ईसाई लोग भी श्रीलंका में रहते है। शेष 1% अन्य समुदायों के लोग श्रीलंका में निवास करते है।
NOTE :- भारत का पड़ोसी द्वीपीय देश श्रीलंका है।
श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद:-
बहुसंख्यकवाद:- यह एक प्रकार का मत है कि बहुसंख्यक समुदाय जिस प्रकार चाहे देश में शासन कर सकता है। बहुसंख्यक सामान्यतः अल्पसंख्यकों की इच्छाओं और आवश्यकताओं की अवहेलना करते है। श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद की स्थिति देखने को मिलती है। जहाँ सिंहलियों का वर्चस्व है।
NOTE :- सन् 1948 में श्रीलंका स्वतंत्र राष्ट्र बना।
Q. बहुसंख्यकवाद को बनाए रखने के लिए श्रीलंका की सरकार द्वारा कौन-कौन से कदम उठाए गए।
Ans:-
- श्रीलंकाई सरकार ने सामाजिक, राजनैतिक एंव आर्थिक क्षेत्रों में सिंहली वर्चस्व स्थापित करने के लिए कई प्रकार के उपाय अपनाए।
- 1956 ई० में श्रीलंका सरकार ने एक कानून बनाया। जिसके तहत तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया।
- विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति भी चली।