कक्षा 11 रसायनशास्त्र अध्याय 07 कार्बनिक रसायन – कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें समाधान पीडीएफ़

रसायनशास्त्र एक बहुत ही कठिन विषय है खासकर इसमे दिय गय रासायनिक समीकरण इस विषय को और भी कठिन बना देते हैं। यहाँ हमने एनसीईआरटी कक्षा 11 रसायनशास्त्र अध्याय 07 कार्बनिक रसायन – कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें समाधान दिया हैं। बोर्डस्टडि द्वारा दिया गया कक्षा 11 रसायनशास्त्र समाधान एनसीईआरटी पुस्तक के अनुसार तैयार किए गए हैं।

यह समाधान छात्रो मे आत्मविश्वास लाने का काम करेगा एवं परीक्षा मे अच्छा स्कोर करने मे मदद करेगा। इस अध्याय की मदद से आप सहसंयोजक बंध, संरचना, अभिक्रिया तंत्र , इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव , समावयवता तथा शोधन तकनीकें जैसी मूलभूत धारणाओ से जुड़ी सभी प्रश्न और उत्तर को अच्छे से समझ सकते हैं। समाधान मे सभी आवधारनाओ को सरल एवं आसान भाषा मे समझाया गया हैं।

कार्बनिक रसायन – कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें संरचना समाधान

अध्याय 06 : साम्यावस्था
अध्याय 08 : अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

एनसीईआरटी अध्याय 07 कार्बनिक रसायन – कुछ आधारभूत सिद्धान्त तथा तकनीकें संरचना के महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न. इलेक्ट्रॉनस्नेही तथा नाभिकस्नेही क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर : इलेक्ट्रॉनस्नेही : इलेक्ट्रॉन युग्म ले जाने वाले अभिकर्मक को इलेक्ट्रॉनस्नेही अर्थात् इलेक्ट्रॉन चाहने वाला कहते हैं।

उदासीन इलेक्ट्रॉनस्नेही :

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धनात्मक इलेक्ट्रॉनस्नेही :

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ये लुइस अम्ल कहलाते हैं।

नाभिकस्नेही : इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करने वाला अभिकर्मक नाभिकस्नेही कहलाता है।

उदासीन नाभिकस्नेही :

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ऋणात्मक नाभिकस्नेही :

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आदि।

प्रश्न . प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रमों के सिद्धांतों का संक्षिप्त विवरण दीजिए :

(क) क्रिस्टलन (ख) आसवन (ग) क्रोमैटोग्रैफी

उत्तर : (क) क्रिस्टलन : यह ठोस कार्बनिक पदार्थों के शोधन की प्राय: प्रयुक्त विधि है। यह विधि कार्बनिक यौगिक तथा अशुद्धि की किसी उपयुक्त विलायक में इनकी विलेयताओं में निहित अंतर पर आधारित होती है। अशुद्ध यौगिक को किसी ऐसे विलायक में घोलते हैं, जिसमें यौगिक सामान्य ताप पर अल्प विलेय होता है, परंतु उच्चतर ताप पर यथेष्ट मात्रा में वह घुल जाता है। विलयन को सांद्रित कर संतृप्त किया जाता है। विलयन को ठंडा कर शुद्ध पदार्थ के रूप में क्रिस्टलित करते हैं। अशुद्ध चीनी का शुद्धीकरण इस विधि द्वारा होता है।

(ख) आसवन : इस विधि की सहायता से वाष्पशील द्रवों को अवाष्पशील अशुद्धियों एवं ऐसे द्रवों, जिनके क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर हो, को पृथक् कर सकते हैं। भिन्न क्वथनांकों वाले द्रव भिन्न ताप पर वाष्पित होते हैं। वाष्पों को ठंडा करने से प्राप्त द्रवों को अलग-अलग एकत्र कर लेते हैं।

(ग) क्रोमैटोग्रैफी या वर्णलेखन : वर्णलेखन शोधन की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण तकनीक है, जिनका उपयोग यौगिकों का शोधन करने में, किसी मिश्रण के अवयवों को पृथक् करने तथा यौगिकों की शुद्धता की जाँच करने के लिए विस्तृत रूप से किया जाता है। वर्णलेखक दो प्रकार का है— (i) अधिशोषण वर्णलेखन, (ii) वितरण-वर्णलेखन।

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