कक्षा 10 इतिहास अध्याय 5 मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।
वैसे तो इतिहास एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 इतिहास अध्याय 5 मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।
मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया नोट्स
अध्याय 4 : औद्योगीकरण का युग
महत्वपूर्ण तथ्य
शुरुआती छपी किताबें :- मुद्रण की सबसे पहली तकनीक चीन, जापान और कोरिया में विकसित हुई। यह छपाई हाथ से होती थी। तकरीबन 594 ई. से चीन में स्याही लगे काठ के ब्लॉक या तख्ती पर कागज़ के दोनों तरफ छपाई संभव नहीं थी।
Q. कैलिग्राफी (खुशनवीसी) क्या है?
Ans:- हाथ से बड़े-बड़े सुन्दर व सुडौल अक्षरों में लिखने की कला को कैलिग्राफी (खुशनवीसी) कहते हैं।
जापान में मुद्रण
- चीनी बौद्ध प्रचारक 768-770 ई. के आस-पास छपाई की तकनीक लेकर जापान आए।
- 868 ई. में जापान की सबसे प्राचीन पुस्तक ‘डायमंड सूत्र‘ का प्रकाशन हुआ, जिसमें पाठ के साथ-साथ काठ पर खुदे चित्र थे।
- जापान में तस्वीरें सामान्यतया वस्त्रों, ताश के पत्तों एवं कागज़ के नोटों पर बनाई जाती थी।
- मध्यकालीन जापान में कवि एवं गद्यकारों की तस्वीरें भी छपती थी। इस समय पुस्तकें सस्ती व सर्वसुलभ थी।
यूरोप में मुद्रण का आना :- यूरोप में मुद्रण संस्कृति के विस्तार को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है:
- चीन से कागज़ का आगमन: वर्षों से चीन से रेशम और मसाले, रेशम मार्ग से यूरोप को भेजे जाते थे। 11वीं सदी में चीनी कागज़ रेशम मार्ग से यूरोप पहुँचा।
- यात्रियों तथा खोजकर्ताओं की भूमिका: 1295 ई. में मार्कोपोलो नामक महान खोजी यात्री चीन में कई वर्षों तक खोज करने के पश्चात् चीन से वुडब्लॉक (काठ की तख्ती) वाली छपाई की तकनीक को साथ लेकर इटली लौटा। अब इटली के लोग भी तख्ती की छपाई से पुस्तकें छापने लगे।
- वुडब्लॉक प्रिंटिंग: पुस्तकों की माँग बढ़ने के साथ-साथ समस्त यूरोप के पुस्तक विक्रेता विभिन्न देशों में इनका निर्यात करने लगे। जगह-जगह पुस्तक मेलों का आयोजन होने लगा। लेकिन पुस्तकों की बदती हुई माँग की पूर्ति होना हस्तलिखित पांडुलिपियों से संभव नहीं थी।
- योहान गुटेनबर्ग एवं प्रिंटिंग प्रेस: यूरोप में अधिक मात्रा में पुस्तकें छापने के लिए इससे भी तेज और सस्ती मुद्रण तकनीक की आवश्यकता थी। ऐसी छपाई करना एक नई तकनीक के आविष्कार से ही सम्भव था। स्ट्रॉसबर्ग के योहान गुटेनबर्ग ने 1448 ई. में अपने ज्ञान और अनुभव का प्रयोग करके जैतून प्रेस का निर्माण किया। जो प्रिंटिंग प्रेस का मॉडल बना। गुटेनबर्ग ने अपनी प्रेस में सर्वप्रथम बाइबिल की पुस्तक छापी।
- छापेखानों की संख्या में वृद्धि: 1450 से 1550 ई. के मध्य यूरोप के अधिकांश देशों में छापेखानों की स्थापना की जा चुकी थी। जर्मनी के प्रिंटर या मुद्रक दूसरे देशों में जाकर नए छापेखाने खुलवाया करते थे। छापेखानों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ पुस्तक उत्पादन में भी तीव्र गति से वृद्धि हुई।
Note: बंगाल गजट नामक साप्ताहिक पत्रिका का सम्पादन जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने किया।