कक्षा 10 इतिहास अध्याय 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।
वैसे तो इतिहास एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 इतिहास अध्याय 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।
यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय नोट्स
अध्याय 2 : भारत में राष्ट्रवाद
महत्वपूर्ण तथ्य
फ्रेड्रिक सॉरयू:- फ्रेड्रिक सॉरयू एक फ्रांसीसी कलाकार था, जिसने 1848 ई. में चार चित्रों की एक श्रृंखला बनाई। इसमें उसने अपने सपनों का एक संसार रचा जो उसके शब्दों में जनतान्त्रिक और सामाजिक गणतन्त्रों से मिलकर बना था।
निरंकुशवाद: एक ऐसी सरकार अथवा शासन व्यवस्था जिसकी सत्ता पर किसी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं होता। इतिहास में ऐसी राजशाही सरकारो को निरंकुश सरकार कहा जाता है। जो अत्यधिक केन्द्रीकृत सैन्य बल पर निर्भर एवं दमनकारी सरकारें होती थी।
कल्पनादर्श (यूटोपिया): यूटोपिया (कल्पनादर्श) एक ऐसे समाज की कल्पना है जो इतना आदर्श है कि उसका साकार होना लगभग असम्भव है।
राष्ट्रवाद को चित्रों के माध्यम से दर्शाने वाला फ्रेड्रिक्क सॉरयू था।
अर्न्स्ट रेनन की समझ के अनुसार एक राष्ट्र की विशेषताएं:-
(1.) एक राष्ट्र लम्बे प्रयासों, त्याग व निष्ठा का चरम बिन्दु होता है।
(2.) राष्ट्र एक बड़ी व्यापक एकता है जिसका अस्तित्व जनमत संग्रह पर निर्भर होता है।
(3.) राष्ट्र में केवल उनके निवासियों को ही सलाह लेने का अधिकार प्राप्त है।
(4.) शौर्य वीरता से मुक्त अतीत, महान पुरुषों के नाम तथा गौरव – यह वह सामाजिक पूँजी है। जिस पर एक राष्ट्रीय विचार आधारित किया गया है।
जनमत संग्रह:- एक प्रत्यक्ष मतदान जिसके माध्यम से एक क्षेत्र के समस्त लोगों को किसी प्रस्ताव को स्वीकृत अथवा अस्वीकृत करने के लिए पूछा जाता है।
सन् 1789 ई० में फ्रांस में राजक्रान्ति हुई थी।
फ्रांसीसी क्रान्ति के परिणामस्वरूप हुए परिवर्तनः- 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रान्ति के परिणामस्वरूप प्रभुसता राजतंत्र से निकलकर फ्रांसीसी नागरिकों के समूह के हाथों में आ गयी। क्रांति ने स्पष्ट रूप से घोषणा की अब लोगों द्वारा राष्ट्र का गठन होगा एवं वे ही राष्ट्र का भाग्य निर्धारित करेंगे।
फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों द्वारा उठाये गए कदम:-
[1.] पितृभूमि एंव नागरिक जैसे विचारों ने एक संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया जिसे एक संविधान के अन्तर्गत समान अधिकार प्राप्त थे।
[2] एक नया फ्रांसीसी झंडा तिरंगा चुना गया जिसने पहले के राष्ट्र ध्वज का स्थान ले लिया।
[3.] आन्तरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिय गये।
[4.] तौलने एंव नापने के लिय एक तरह की व्यवस्था लागू की गयी।
[5.] क्षेत्रीय बोलियों के स्थान पर पेरिस की फ्रेंच भाषा ही राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित हुई।