एनसीईआरटी कक्षा 12 गणित अध्याय 6 अवकलज के अनुप्रयोग नोट्स

कक्षा 12 एक बोर्ड कक्षा हैं और कक्षा 12 में दिय गय अध्याय थोड़ा पेंचीदा भी हैं। इसलिय छात्रों के समस्या को कम करने के लिए हमने बोर्डस्टडी एक्सपर्ट द्वारा तैयार कक्षा 12 गणित अध्याय 6 अवकलज के अनुप्रयोग नोट्स दिया हैं। ये कक्षा 12 छात्रों के लिए रामबाण हैं। इसलिय कक्षा 12 में अध्ययरत सभी छात्र एवं छात्राओं को इस नोट्स का लाभ उठाना चाहिय।

जेईई और बोर्ड दोनों एग्जाम के तैयारी के लिए कक्षा 12 गणित अध्याय 6 अवकलज के अनुप्रयोग नोट्स बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इसमें अवकलज के अनुप्रयोग अध्याय के सभी कॉन्सेप्ट को विस्तार से समझाया गया हैं जिससे छात्रों को समझने में आसानी हो।

अवकलज के अनुप्रयोग नोट्स

अध्याय 5: सांतत्य तथा अवकलनीयता नोट्स
अध्याय 7: समाकलन नोट्स

नोट्स को बहुत ही अच्छे एवं सुव्यवस्थित ढंग से लिखा गया हैं जिससे छात्र को नोट्स पढ़ने के दौरान कोई कठिनाई न हों। इसका उपयोग छात्र अपने नियमित अध्यन के समय एवं एग्जाम के समय में भी कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

* अवकलज – राशियों के परिवर्तन की दर ही अवकलन है,

यदि एक राशि y, दूसरी राशि x के सापेक्ष किसी नियम y=f(x) को संतुष्ट करते हुए\text{यदि एक राशि } y \text{, दूसरी राशि } x \text{ के सापेक्ष किसी नियम } y = f(x) \text{ को संतुष्ट करते हुए} \\
परिवर्तित होती है तो dydx को y का x के सापेक्ष अवकलन कहते हैं।\text{परिवर्तित होती है तो } \frac{dy}{dx} \text{ को } y \text{ का } x \text{ के सापेक्ष अवकलन कहते हैं।}
उदा 1: वृत्त के क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर इसकी त्रिज्या r के सापेक्ष ज्ञात कीजिए जब\text{उदा 1: वृत्त के क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर इसकी त्रिज्या } r \text{ के सापेक्ष ज्ञात कीजिए जब} \\
r=5 cm. है।r = 5 \text{ cm. है।} \\
हल :- वृत्त की त्रिज्या =r\text{हल :- वृत्त की त्रिज्या } = r \\
वृत्त का क्षेत्रफल A=πr2\text{वृत्त का क्षेत्रफल } A = \pi r^2 \\
r के सापेक्ष अवकलन करने परr \text{ के सापेक्ष अवकलन करने पर}
dAdr=π⋅2r=2πr\frac{dA}{dr} = \pi \cdot 2r = 2\pi r \\
dAdr(जब r=5 cm. तो)=2π×5\frac{dA}{dr} (\text{जब } r = 5 \text{ cm. तो}) = 2\pi \times 5 \\
=10π= 10\pi \\
अतः वृत्त का क्षेत्रफल A, वृत्त की त्रिज्या r के सापेक्ष 10π cm2/cm की दर से परिवर्तित हो\text{अतः वृत्त का क्षेत्रफल } A \text{, वृत्त की त्रिज्या } r \text{ के सापेक्ष } 10 \pi \text{ cm}^2/\text{cm} \text{ की दर से परिवर्तित हो} \\
रहा है।\text{रहा है।} \\
∗ x का मान बढ़ने से यदि y का मान बढ़ता है तो dydx धनात्मक होता है और x का मान बढ़ने* \text{ } x \text{ का मान बढ़ने से यदि } y \text{ का मान बढ़ता है तो } \frac{dy}{dx} \text{ धनात्मक होता है और } x \text{ का मान बढ़ने}

वर्धमान फलन – यदि x के किन्हीं दो मानों x1 और x2 के लिए, जहाँ x1 < x2 और इन बिन्दुओं पर फलन का मान f(x1) व f(x2) है, तो फलन वर्धमान फलन कहलाता है

ह्रासमान फलन – यदि x के किन्हीं दो मानों x1 और x2 के लिए, जहाँ x1 < x2 है और इन बिन्दुओं पर फलन के मान f(x1) व f(x2) हैं तो फलन ह्रासमान फलन कहलाता है,

 उच्चतम और निम्नतम मान – एक फलन कई बिन्दुओं पर घटता और बढ़ता रहता है, उन कई बिन्दुओं में से वह एक बिन्दु जिस पर फलन स्थानीय अधिकतम पर पहुँचता है, फलन का उच्चतम मान कहलाता है,

उन कई बिन्दुओं में से वह एक बिन्दु जिस पर फलन स्थानीय निम्नतम पर पहुँचता है, फलन का निम्नतम मान कहलाता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *