कक्षा 10 अर्थशास्त्र 5 उपभोक्ता अधिकार नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।
वैसे तो अर्थशास्त्र एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 5 उपभोक्ता अधिकार नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।
उपभोक्ता अधिकार नोट्स
अध्याय 4 : वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
महत्वपूर्ण तथ्य
उपभोक्ता:- किसी वस्तु या सेवा का बाजार से क्रय कर उपभोग करने वाले व्यक्ति को उपभोक्ता कहते हैं।
बाजार में उपभोक्ता:- बाजार में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियमों व विनियमों की आवश्यकता होती है। जिसके निम्नलिखित कारण है।
- कमजोर उपभोक्ता:- बाजार में व्यक्तिगत उपभोक्ता स्वयं को प्राय: कमजोर स्थिति में पाते है। खरीदी गई वस्तु या सेवा के बारे में जब भी कोई शिकायत होती है। तो विक्रेता समस्त उत्तरदायित्व क्रेता पर डालने का प्रयास करता है। ऐसी स्थिति में अधिकतर उपभोक्ताओं का शोषण होता है।
- उपभोक्ता का शोषण:- बाजार में उपभोक्ताओं का शोषण कई रूपों में होता है। उदाहरण के लिए कई बार बेईमान दुकानदार उचित वजन से कम वजन तोलते है। अथवा व्यापारिक शुल्क को जोड़ देते है। जिनका वर्णन पहले नहीं किया गया हो अथवा मिलावटी वस्तुएँ बेच देते है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा हेतु नियमों – विनियमों की आवश्यकता होती है।
- अनुचित बाजार:- जब उत्पादक कम संख्या में एंव अधिक शक्तिशाली होते है। तो बाजार का संचालन उचित ढंग से नहीं हो पाता है। विशेष रूप से यह स्थिति तब होती है। जब इन वस्तुओं का उत्पादन बड़ी कम्पनियाँ कर रही होती है।
- गलत सूचना:- उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए अधिकांश बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ समय-समय पर मीडिया व अन्य संकेतों के माध्यम से गलत सूचनाएँ उपलब्ध कराती है। जैसे- एक कम्पनी पाऊडर वाला दूध बेचती है और यह दावा करती है। कि उसका उत्पाद माँ के दूध से बेहतर है। तो यह सरासर झूठ होगा।
उपभोक्ता आंदोलन:- भारत में उपभोक्ता आंदोलन का प्रारम्भ उपभोक्ताओं के असन्तोष के कारण हुआ क्योंकि विक्रेता कई अनुचित व्यावसायिक व्यवहारों में सम्मिलित होते थे। बाजार में उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। यह मान लिया गया था कि वस्तु या सेवा खरीदते समय सावधान रहना उपभोक्ता की जिम्मेदारी है।
भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरूआत निम्नलिखित कारणों से हुई
- उपभोक्ताओं का असन्तोष
- बाजार में उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के लिए किसी कानून का न होना
- अत्यधिक खाद्य पदार्थों की कमी
- जमाखोरी
- कालाबाजारी
- खाद्य पदार्थों एंव खाद्य तेलों में मिलावट
उपभोक्ता इंटरनेशनल:- एक गैर सरकारी संस्था जो सम्पूर्ण विश्व में उपभोक्ता समूहों की एजेन्सियों का प्रतिनिधित्व करता है।