कक्षा 10 भूगोल अध्याय 3 जल संसाधन नोट्स एवं पीडीएफ़

कक्षा 10 भूगोल अध्याय 3 जल संसाधन नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।

वैसे तो भूगोल एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 भूगोल अध्याय 3 जल संसाधन नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।

जल संसाधन नोट्स

अध्याय 4 : कृर्षि

महत्वपूर्ण तथ्य

  • जल एक नवीकरण योग्य संसाधन है।
  • पृथ्वी का तीन चौथाई धरातल जल से ढका हुआ है, परन्तु इसमें प्रयोग में लिया जा सकने वाला जल बहुत कम है। क्योंकि यह जल लवणीय है।
  • दुनिया में पानी की कुल मात्रा का 96.5% समुद्र के रूप में मौजूद है। और केवल 2.5% मीठे पानी के रूप मे अनुमानित है
  • ऐसी आंशका की जाती हैं की 2025 तक विश्व के बड़े हिस्से पानी की कमी वाले छेत्रों में शामिल हो जायंगे। 

जल संसाधन: पृथ्वी के भूतल पर द्रव, ठोस एंव वाष्प के रूप में उपलब्ध जल को जल संसाधन कहते है।

अलवणीय जल: नमकरहित अर्थात मीठे जल को अलवणीय जल कहा जाता है। (अलवणीय जल प्राप्ति का स्रोत सतही अपवाह एंव भौम जल है।)

भौमजल:- धरातल के नीचे चट्टानों की दरारों व छिद्रों में अवस्थित जल “भौमजल” कहलाता है।

सतही अपवाह:- धरातल पर स्थित विभिन्न जलस्रोत- नदियाँ, झीलें, नहरें या विभिन्न जलाशय “सतही अपवाह” कहलाते है।

जल दुर्लभता और जल संरक्षण एव प्रबंधन की आवशयकता:-

जल दुर्लभताः- मांग की तुलना में जल की कमी होना जल दुर्लभता

कहलाती है।

Note:- स्वीडन के एक विशेषज्ञ फाल्कन मार्क ने जल दुर्लभता को निम्न प्रकार से परिभाषित किया है।

जल की कमी तब होती है जब प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष 1000 से 1600 घन मीटर के मध्य जल उपलब्ध होता है।

जल दुर्लभता के कारण:- भारत में जल दुर्लभता के प्रमुख कारण निम्नलिखित है।

(1.) जल के वितरण में असमानता:- हमारे देश में वर्षा में वार्षिक एवं मौसमी परिवर्तनों के कारण जल संसाधनों की उपलब्धता में समय और स्थान के अनुसार विभिन्नता पायी जाती है। जहाँ एक तरफ हमारे देश मॉसिनराम में विशव की सर्वाधिक वर्षा होती है। वहीं राजस्थान का मरुस्थल सूखाग्रस्त है।

(2.) बढ़ती हुई जनसंख्या:- हमारे देश में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है। जिस कारण जल की मांग में निरन्तर वृद्धि हो रही है। जल की बढ़ती माँग एंव उसका असमान वितरण जल दुर्लभता का कारण बनता जा रहा है।

(3.) सिंचाई:- जल की उपलब्धता जनसंख्या के लिए सिर्फ घरेलू उपभोग के लिए ही नहीं बल्कि अधिक अनाज उगाने के लिए भी आवशयक है। अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए जल संसाधनों का अति शोषण करके ही सिंचित क्षेत्र में वृद्धि की जा सकती है।

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