कक्षा 10 भूगोल अध्याय 4 कृर्षि नोट्स 10वी के छात्रो के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण अध्ययन समाग्री हैं। 10वी कक्षा एक बोर्ड कक्षा है अतः छात्रो को बहुत ही ध्यान से अध्ययन करना चाहिय। बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा बनाया गया यह नोट्स एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया हैं।
वैसे तो भूगोल एक रोचक विषय हैं लेकिन इसमे दिय गय तथ्यों को याद रखना कठिन हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने कक्षा 10 भूगोल अध्याय 4 कृर्षि नोट्स तैयार किया हैं। जिसके मदद से आप दिय गए अध्याय को अच्छे से समझ सकते हैं।
कृर्षि नोट्स
अध्याय 5: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन नोट्स
महत्वपूर्ण तथ्य
कृषि:- भूमि की जुताई कर फसल उत्पन्न करने और पशुपालन कला को कृषि कहा जाता है।
Note:- भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि एक प्राथमिक क्रिया है। भारत की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यो में लगी हुई है।
कृषि के प्रकार:- कृषि के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित है-
प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि:- प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि, कृषि का एक आदिम रूप है। इस प्रकार की कृषि हमारे देश के कुछ भागों में आज भी की जाती है। यह कृषि जंगलों में निवास करने वाले आदिवासी एव पिछड़ी जातियों द्वारा की जाती है।
विशेषताएँ:-
- इस प्रकार की कृषि भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों पर की जाती है।
- इस प्रकार की कृषि में पुरानी तकनिक एवं आदिम औजारों का प्रयोग किया जाता है।
- इस प्रकार की कृषि परिवार अथवा समुदाय श्रम की सहायता से की जाती है।
- इस कृषि में उत्पादकता कम होती है।
- इस प्रकार की कृषि के अन्तर्गत मुख्य रूप से खाद्यान्न फसलों का उत्पादन किया जाता है।
कर्तन दहन प्रणाली:- यह एक प्रकार की स्थानांतरित कृषि है। जिसमें खेती के लिए जमीन को साफ करने के लिए प्राकृतिक वनस्पतियों को काटकर जला दिया जाता है। और फिर किसान एक किसी नए भूखंड में चला जाता है। और जब भूखंड अनुपजाऊ हो जाता है। तो प्रक्रिया को दोहराता है। यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है।
Note:- देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है। उतरी – पूर्वी राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम एव नागालैण्ड में इसे झूम अथवा झूमिंग कहा जाता है। मणिपुर में पामलू, छतीसगढ़ के बस्तर जिले एवं अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में इसे दीपा, मध्यप्रदेश में बेबर या दहिया, आन्ध्रप्रदेश में पोडु या पेंडा, ओडिसा में यामाडाबी, पश्चिमी घाट में कुमारी, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में वालरे या
वाल्टरे, हिमालय क्षेत्रों में खिल तथा झारखण्ड में कुरूवा आदि नामों से जाना जाता है।
गहन जीविका कृषि:- गहन जीविका कृषि एक प्रकार की श्रम गहन खेती हैं जिसमें अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव रासायनिक निवेशों एवं सिचाई का उपयोग किया जाता है।
इस प्रकार की कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ खेती की जाने वाली भूमि सीमित होती है तथा जनसख्या का घनत्व अधिक होता हैं।
विशेषताएँ:-
- यह एक श्रम गहन खेती है।
- इस कृषि में प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक होता है।
- इस कृषि में अत्यधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए जैव रासायनिक निवेंशो व सिचाई का अधिक प्रयोग किया जाता है।