एनसीईआरटी कक्षा 12 गणित अध्याय 11 त्रि-विमीय ज्यामिति नोट्स

कक्षा 12 एक बोर्ड कक्षा हैं और कक्षा 12 में दिय गय अध्याय थोड़ा पेंचीदा भी हैं। इसलिय छात्रों के समस्या को कम करने के लिए हमने बोर्डस्टडी एक्सपर्ट द्वारा तैयार कक्षा 12 गणित अध्याय 11 त्रि-विमीय ज्यामिति नोट्स दिया हैं। ये कक्षा 12 छात्रों के लिए रामबाण हैं। इसलिय कक्षा 12 में अध्ययरत सभी छात्र एवं छात्राओं को इस नोट्स का लाभ उठाना चाहिय।

जेईई और बोर्ड दोनों एग्जाम के तैयारी के लिए कक्षा 12 गणित अध्याय 11 त्रि-विमीय ज्यामिति नोट्स बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इसमें त्रि-विमीय ज्यामिति अध्याय के सभी कॉन्सेप्ट को विस्तार से समझाया गया हैं जिससे छात्रों को समझने में आसानी हो।

त्रि-विमीय ज्यामिति नोट्स

नोट्स को बहुत ही अच्छे एवं सुव्यवस्थित ढंग से लिखा गया हैं जिससे छात्र को नोट्स पढ़ने के दौरान कोई कठिनाई न हों। इसका उपयोग छात्र अपने नियमित अध्यन के समय एवं एग्जाम के समय में भी कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

रेखा के दिक्-कोसाइन – माना एक रेखा PQ अंतरिक्ष में है। PQ के समान्तर एक रेखा मूल\textbf{\text{रेखा के दिक्-कोसाइन -}} \text{ माना एक रेखा } PQ \text{ अंतरिक्ष में है। } PQ \text{ के समान्तर एक रेखा मूल} \\
बिन्दु O से होते हुए OR खींची गई है।\text{बिन्दु } O \text{ से होते हुए } OR \text{ खींची गई है।} \\
यदि OR अक्ष OX,OY तथा OZ के साथ α,β,γ कोण बनाती है, तो\text{यदि } OR \text{ अक्ष } OX, OY \text{ तथा } OZ \text{ के साथ } \alpha, \beta, \gamma \text{ कोण बनाती है, तो} \\
cos⁡α,cos⁡β,cos⁡γ को रेखा PQ के दिक्-कोसाइन कहते हैं। इसको क्रमश: l,m,n से\cos \alpha, \cos \beta, \cos \gamma \text{ को रेखा } PQ \text{ के दिक्-कोसाइन कहते हैं। इसको क्रमश: } l, m, n \text{ से} \\
प्रदर्शित करते हैं।\text{प्रदर्शित करते हैं।}

रेखा के दिक्-अनुपात – वे संख्यायें जो दिक्-कोसाइन के समानुपाती हैं दिक्-अनुपात कहलाती हैं।

माना a,b तथा c दिक्-कोसाइन l,m तथा n के समानुपाती हैं तो a,b,c रेखा के\text{माना } a, b \text{ तथा } c \text{ दिक्-कोसाइन } l, m \text{ तथा } n \text{ के समानुपाती हैं तो } a, b, c \text{ रेखा के} \\
दिक्-अनुपात कहलायेंगे।\text{दिक्-अनुपात कहलायेंगे।}
a∝l⇒a=lra \propto l \Rightarrow a = lr \\
b∝m⇒b=mrb \propto m \Rightarrow b = mr \\
c∝n⇒c=nrc \propto n \Rightarrow c = nr \\
a2+b2+c2=r2(l2+m2+n2)[∵l2+m2+n2=1]a^2 + b^2 + c^2 = r^2(l^2 + m^2 + n^2) \quad [\because l^2 + m^2 + n^2 = 1] \\
a2+b2+c2=r2⇒r=a2+b2+c2a^2 + b^2 + c^2 = r^2 \Rightarrow r = \sqrt{a^2 + b^2 + c^2} \\
∴l=a/r,m=b/r,n=c/r\therefore l = a/r, \quad m = b/r, \quad n = c/r
अतः l=aa2+b2+c2;m=ba2+b2+c2;n=ca2+b2+c2\text{अतः } l = \frac{a}{\sqrt{a^2 + b^2 + c^2}}; \quad m = \frac{b}{\sqrt{a^2 + b^2 + c^2}}; \quad n = \frac{c}{\sqrt{a^2 + b^2 + c^2}}

समतल पर अभिलम्ब – कोई रेखा जो समतल पर स्थित सभी रेखाओं पर लम्ब हो, समतल पर अभिलम्ब कहलाती है। समतल पर सभी अभिलम्ब एक-दूसरे के समान्तर होते हैं।

किसी समतल को कई प्रकार से निर्धारित किया जा सकता है।

  • तीन असंरेख बिन्दुओं से होकर एक और केवल एक समतल खींचा जा सकता है।
  • दी हुई दो संगामी रेखाएं एक विशिष्ट समतल को निर्धारित करती हैं।
  • एक बिन्दु से दी हुई दूरी पर एवम् दी हुई दिशा के लम्बवत् एक और केवल एक समतल खींचा जा सकता है।
  • एक समतल पर एक बिन्दु और उसका अभिलम्ब अद्वितीय समतल का निर्धारण करते हैं।

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