कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 5 कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति समाधान पीडीएफ़

बोर्डस्टडि एक्सपेर्ट द्वारा तैयार किया गया कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 5 कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति समाधान एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया है। समाधान को बहुत ही आसान भाषा मे दिया गया है ताकि छात्रो को समझने मे कोई दिक्कत न हो।

कक्षा 11 को अच्छे से पढ़ना बहुत ही जरूरी है क्योंकि यह कक्षा 12 के लिय आधार बनाने का काम करती है। परीक्षा मे अच्छा स्कोर करने के लिय सभी प्रश्नों का उत्तर कुशल तरीके से दिया जाना बहुत ही जरूरी हैं। कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति समाधान छात्रो के लिय बहुत ही मददगार साबित होगा। बोर्डस्टडि पर आपको कक्षा 11 से संबधित और भी अध्ययन समाग्री मिल जायगी।

कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति समाधान

अध्याय 4: गति के नियम
अध्याय 6: कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

अध्याय को अच्छे से समझने के लिय अध्याय मे दिय गय सभी प्रश्नों एवं अतिरिक्त प्रश्नों का अभ्यास बहुत जरूरी हैं। पिछले वर्ष का प्रश्न पत्र हल करना भी एक्जाम की तैयारी मे काफी मददगार साबित होता हैं।

एनसीईआरटी अध्याय 5 कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति के महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न . निम्नलिखित का उत्तर दीजिए।

(a) किसी रॉकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई-रॉकेट या वातावरण?

(b) धूमकेतु सूर्य के चारों ओर बहुत ही दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में धूमते हैं। साधारणतया धूमकेतु पर सूर्य का गुरुत्वीय बल धूमकेतु के लम्बवत् नहीं होता है। फिर भी धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है। क्यों?

(c) पृथ्वी के चारों ओर बहुत ही क्षीण वायुमण्डल में घूमते हुए किसी कृत्रिम उपग्रह की ऊर्जा धीरे-धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध (चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो) के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है फिर भी जैसे-जैसे कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है तो उसकी चाल में लगातार वृद्धि क्यों होती है?

(d) चित्र (i) में एक व्यक्ति अपने हाथों में 15 kg का कोई द्रव्यमान लेकर 2 m चलता है। चित्र (ii) में वह उतनी ही दूरी अपने पीछे रस्सी को खींचते हुए चलता है। रस्सी घिरनी पर चढ़ी हुई है और उसके दूसरे सिरे पर 15 kg का द्रव्यमान लटका हुआ है। परिकलन कीजिए कि किस स्थिति में किया गया कार्य अधिक है?

image 8

उत्तर : (a) रॉकेट के उड़ान के दौरान, उसके बाह्य आवरण के जलने में आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा राकेट से प्राप्त होती है। यह ऊर्जा वातावरण से प्राप्त नहीं होती है जब बाह्य आवरण जलता है तब रॉकेट का द्रव्यमान घटता जाता है अतः रॉकेट की कुल ऊर्जा घटती जाती है।

(b) गुरुत्वीय बल एक संरक्षी बल है तथा बद्ध पथ पर संरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य शून्य होता है। इसलिए धूमकेतु की प्रत्येक सम्पूर्ण कक्षा के अनुदिश गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।

(c) जब कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के निकट आता है तो इसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कम हो जाती है। (क्योंकि पृथ्वी की सतह से ऊँचाई कम होती जाती है) चूँकि ऊर्जा संरक्षण के नियम से गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का वेग नियत रहता है इसलिए स्थितिज ऊर्जा घटने पर गतिज ऊर्जा बढ़ती जाती है। गतिज ऊर्जा का मान

K=1/2mv2होता है। जब गतिज ऊर्जा बढ़ती है तो वेग भी बढ़ता है जबकि उपग्रह की ऊर्जा धीरे-धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है।

(d) प्रथम स्थिति में व्यक्ति, 15 किग्रा वाले भार पर ऊपर की ओर बल लगाता है जिसकी दिशा भार की दिशा के विपरीत है तथा व्यक्ति 2 मी तक क्षैतिज दिशा में चलता है तब आरोपित बल तथा विस्थापन के बीच का कोण 90° होता है।

∴                 किया गया कार्य W = Fs cos 90°

                                     = 0       (∵ cos 90° = 0)

द्वितीय स्थिति में व्यक्ति द्वारा आरोपित बल की दिशा क्षैतिज है तथा वह क्षैतिज दिशा में गति करता है इसलिए आरोपित बल तथा विस्थापन के कोण शून्य होगा।

∴    किया गया कार्य W = Fs cos 0° = 15 × 9.8 × 2 = 294 J

अतः द्वितीय स्थिति में किया गया कार्य अधिक है।

प्रश्न . विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए

n→p+e

प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिंड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के β-क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता।

image 9

नोट : इस अभ्यास का उत्तर उन कई तर्कों में से एक है जिन्हें डब्ल्यू पॉली द्वारा β-क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था। यह कण न्यूट्रिनों के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण 1/2 (जैसे e-1 , p या n) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्रव्यमानरहित या (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) इसका द्रव्यमान अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय-प्रक्रिया इस प्रकार है n→p+e+v

उत्तर : मुक्त न्यूट्रॉन की क्षय प्रक्रिया, माना इस प्रक्रिया में द्रव्यमान क्षति △m है।

द्रव्यमान क्षति = न्यूट्रॉन का द्रव्यमान – न्यूट्रॉन व इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान

यह द्रव्यमान क्षति निश्चित है तथा इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निश्चित होनी चाहिए। अतः द्विपिण्ड क्षय किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के β-क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *