इस पोस्ट मे हमने एनसीईआरटी के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 12 भौतिकी अध्याय 7 प्रत्यवर्ती धारा का समाधान दिया हैं। हमने अध्याय मे मौजूद सभी प्रश्नों का समाधान सरल एवं स्पष्ट भाषा मे दिया हैं।
छात्रो के लिय प्रत्यवर्ती धारा अध्याय को अच्छे से समझना बहुत जरूरी हैं। इस अध्याय की मदद से आप एसी वोल्टेज, प्रतिरोध जैसी मूलभूत धारणाओ को अच्छे से समझ सकते हैं। परीक्षा मे अच्छा स्कोर करने के लिय इन धारणाओ को अच्छे से समझना बहुत जरूरी हैं।
प्रत्यवर्ती धारा समाधान
अध्याय 6: वैधुतचुम्बकीय प्रेरण समाधान
अध्याय को अच्छे से समझने के लिय अध्याय मे दिय गय सभी प्रश्नों एवं अतिरिक्त प्रश्नों का अभ्यास बहुत जरूरी हैं। पिछले वर्ष का प्रश्न पत्र हल करना भी एक्जाम की तैयारी मे काफी मददगार साबित होता हैं।
एनसीईआरटी अध्याय 7 प्रत्यवर्ती धारा के महत्वपूर्ण प्रश्न
Q. कल्पना कीजिए कि प्रश्न 7 में संधारित्र पर प्रारम्भिक आवेश 6mc है। प्रारम्भ में परिपथ में कुल कितनी ऊर्जा संचित होती है? बाद में कुल ऊर्जा कितनी होगी?
दिया है, संधारित्र का आवेश
Q = 6mc = 6 x 10-3
C = 30μF
= 30 x 10 -6 F
परिपथ में संचित ऊर्जा


कुछ समय पश्चात् ऊर्जा C तथा L के मध्य वितरित होती है तथा कुल ऊर्जा नियत रहती है। अतः हम कह सकते हैं कि ऊर्जा का क्षय नहीं होता है।
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 18 में प्रतिरोध Ω है। परिपथ के हर अवयव को स्थानान्तरित माध्य शक्ति तथा सम्पूर्ण अवशोषित शक्ति को परिकलित कीजिए।
दिया है, वोल्टेज का rms मान Vrms = 230V
प्रतिरोध R = 15 Ω
आवृत्ति f = 50Hz
कुण्डली तथा संधारित्र में औसत शक्ति शून्य है चूँकि v
व i
में कलान्तर 900 है।
कुल शोषित शक्ति = प्रतिरोध द्वारा ग्रहण की गई शक्ति Pav = Vrms Irms




कुल ग्रहण की गई शक्ति




अतः कुल ग्रहण की गई शक्ति 790.6W है।
Q. एक शक्ति संप्रेषण लाइन अपचायी ट्रांसफॉर्मर में जिसकी प्राथमिक कुण्डली में 4000 फेरें हैं 2300 वोल्ट पर शक्ति निवेशित करती है। 230V की निर्गत शक्ति प्राप्त करने के लिए द्वितीयक में कितने फेरें होने चाहिए?
दिया है, प्राथमिक वोल्टेज Vp = 2300V
Np = 4000 फेरें
द्वितीयक वोल्टेज V8 = 230V
चूँकि ट्रांसफॉर्मर आदर्श है अतः इसमें ऊष्मन के रूप में शक्ति क्षय शून्य है।
सूत्र प्रयुक्त करने पर



अतः द्वितीयक कुण्डली में तार के फेरों की संख्या 400 है।